Thursday 3 October 2013

प्रभात 41

मन आंगन में पड़ी स्नेह वर्षा फुहार
खिली उठी धरा, खिला मन का संसार
आया नव दिवस लिए फिर स्वपन हजार
आओ प्रीत से ले आयें हर जीवन में बहार
शुभ मंगल प्रभात शुभ दिवस
11.52am, 15 jan 2012

man aangan mein padi sneh varsha fuhar
khil uthi dhara, khila man ka sansar
aaya nav diwas liye fir swapn hajar
aao preet se le aayein har jeevan mein bahar

shubh mangal prabhat

Thursday 4 July 2013

प्रभात 40


ऊषा  ने  पलकें  खोली
धरा  बांवरी  सी  डोली 

हवा  मतवाली  सी  हो  ली
फूल, कलियों  डोल  के  बोली
उठ  जा  अब  तू  बहुत  सो  ली

usha ne palkein kholi
dhara banwri si doli
hawa matwali si ho li
phool, kaliyon dol ke boli
uth ja ab tu bahut so li

11.52 am

Tuesday 19 March 2013

shubham bhavtu


मैं माटी की काया
माटी का रूप समाया
हरियाली हरती थकान
देती हर ताप से आराम

जल से चलता जीवन

प्रकृति को देता यौवन

10.52pm, 18/3/2013

mai mati ki kaya
mati ka roop samaya
hariyali harti thakaan
deti har taap se araam
jal se chalta jeevan
prakriti ko deta yauvan


Tuesday 1 January 2013

मैं सोचूं






जब  मैं  सोचूं  कैसा  हो  सवेरा
जानूं  जो  तन-मन  की  स्फूर्ति  लिए  हो
जब  मैं  सोचूं  कैसी  हो  मानसिकता
मन  मुस्काएं, जब  परम  शांति  लिए  हो
जब  मैं  सोचूं  हो  दर्शन  किसके
प्रभु  तुल्य  मात-पिता, और  मेरे  अपने  के
जब  मैं सोचूं  बीते  कैसा  दिवस
कहे  निर्मल  हृदय  सेवानेह  से  भरा  हुआ
जब  मैं सोचूं  हो  अवसान  कैसा
मन  में  संकल्प  लिए  करना  है  बस  सबका  भला
अब  मैं  सोचूं  जब  हर  दिवस  का  आव्हान, अवसान हो
होंठों  पर  मुस्कान  हो, दूसरों  के  मानदर्द  का  भान  हो

 7.20pm, 31/12/12
 jab mai sochun kaisa ho savera
jaanu jo tan-man ki sfurti liye ho
jab mai sochun kaisi ho mansikta
man muskayein, jab param shanti liye ho
jab mai sochun ho darshan kiske
prabhu tulya maat-pita, aur mere apnon ke
jab mai sochun beete kaisa diwas
kahe nirmal hriday seva neh se bhara hua
jab mai sochun ho avsaan kaisa
man mein sankalp liye karna hai bas sabka bhala
ab mai sochun jab har diwas ka avhan, avsaan ho
har honthon par muskaan ho, dusron ka bhaan ho


7.20pm, 31/12/12