Tuesday 1 January 2013

मैं सोचूं






जब  मैं  सोचूं  कैसा  हो  सवेरा
जानूं  जो  तन-मन  की  स्फूर्ति  लिए  हो
जब  मैं  सोचूं  कैसी  हो  मानसिकता
मन  मुस्काएं, जब  परम  शांति  लिए  हो
जब  मैं  सोचूं  हो  दर्शन  किसके
प्रभु  तुल्य  मात-पिता, और  मेरे  अपने  के
जब  मैं सोचूं  बीते  कैसा  दिवस
कहे  निर्मल  हृदय  सेवानेह  से  भरा  हुआ
जब  मैं सोचूं  हो  अवसान  कैसा
मन  में  संकल्प  लिए  करना  है  बस  सबका  भला
अब  मैं  सोचूं  जब  हर  दिवस  का  आव्हान, अवसान हो
होंठों  पर  मुस्कान  हो, दूसरों  के  मानदर्द  का  भान  हो

 7.20pm, 31/12/12
 jab mai sochun kaisa ho savera
jaanu jo tan-man ki sfurti liye ho
jab mai sochun kaisi ho mansikta
man muskayein, jab param shanti liye ho
jab mai sochun ho darshan kiske
prabhu tulya maat-pita, aur mere apnon ke
jab mai sochun beete kaisa diwas
kahe nirmal hriday seva neh se bhara hua
jab mai sochun ho avsaan kaisa
man mein sankalp liye karna hai bas sabka bhala
ab mai sochun jab har diwas ka avhan, avsaan ho
har honthon par muskaan ho, dusron ka bhaan ho


7.20pm, 31/12/12