Thursday 11 September 2014

प्रभात 44

आज  जब  फिर  जिंदगी  मुझसे  मिलने  आई
मैं  भी  उठ  कर  आगे  बढ़  गई,  बाहें  फैलाई
उसने  नर्म,  मजबूत  हाथों  से  थामा  मुझे
कहा- चल  उठ, पोंछ  अश्रु,  अब  आगे  चलें
शुभ  प्रभात,  शुभ  दिवस
 
 
१०.५६ प्रातः ,१२ नवम्बर,२०११ 

aaj jab fir jindagi mujhse milne aayi
mai bhi uth kar aage badh gai bahein failaee
usne narm majboot hathon se thaama mujhe
kaha-'chal uth, ponchh ashru ab aage chalein'
shubh prabhat , shubh diwas

6 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (12.09.2014) को "छोटी छोटी बड़ी बातें" (चर्चा अंक-1734)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. बहुत सुंदर-शुभ-प्रभात

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  3. बहुत खूब

    अतीत पर रोना रोकर नही इतिहास को जहन में रखकर आगे बढ़ना एक कामयाब दिन की शुरुवात है

    रंगरूट

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  4. सच रो धोकर निराशा के अलावा कुछ भी हासिल नहीं होता ..
    ...हर रात की सुबह होती हैं
    बहुत सुन्दर

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  5. हर दिन नयी शुरुआत...

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  6. करें शुरुवात एक कामयाब दिवस की। सुंदर विचार।

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